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भारत-रूस संयुक्त नौसैनिक अभ्यास: फरवरी 2026 में बंगाल की खाड़ी में होगा MILAN-2026

विशाखापत्तनम, 30 जनवरी 2026: भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। रूसी समाचार एजेंसी TASS की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 में भारत और रूस बंगाल की खाड़ी में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास MILAN-2026 का आयोजन करने जा रहे हैं। यह अभ्यास भारतीय नौसेना के पूर्वी नौसेना कमान द्वारा आयोजित किया जाएगा और इसमें 50 से अधिक देशों की भागीदारी होगी।

रूसी प्रशांत बेड़े का फ्रिगेट मार्शल शापोशनिकोव होगा मुख्य आकर्षण

रूसी मैरिटाइम बोर्ड की प्रेस सर्विस के अनुसार, रूसी प्रशांत बेड़े का आधुनिकीकृत फ्रिगेट मार्शल शापोशनिकोव इस अभ्यास में हिस्सा लेगा। यह युद्धपोत ओमान के मस्कट बंदरगाह से रवाना होकर बंगाल की खाड़ी में MILAN-2026 अभ्यास में शामिल होगा।

TASS की रिपोर्ट के मुताबिक, "बंदरगाह छोड़ने के बाद, यह पोत अपने मिशन को जारी रखेगा और उत्तरी हिंद महासागर की बंगाल की खाड़ी में रूसी-भारतीय MILAN-2026 अभ्यास में भाग लेगा।"

18-25 फरवरी तक विशाखापत्तनम में रहेगा रूसी फ्रिगेट

अभ्यास के हिस्से के रूप में, मार्शल शापोशनिकोव फ्रिगेट 18 से 25 फरवरी 2026 तक भारतीय बंदरगाह विशाखापत्तनम में अनौपचारिक यात्रा करेगा। यह दौरा भारत-रूस के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का प्रतीक है।

भारतीय नौसेना के पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला ने अक्टूबर 2025 में घोषणा की थी कि भारतीय नौसेना फरवरी 2026 में रूस और अमेरिका सहित 50 से अधिक देशों की भागीदारी के साथ अंतर्राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू और MILAN अभ्यास का आयोजन करेगी।

मार्शल शापोशनिकोव: आधुनिक युद्धपोत की विशेषताएं

मार्शल शापोशनिकोव एक उदालॉय-क्लास डिस्ट्रॉयर है जिसे बाद में फ्रिगेट के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया गया है। यह 1985 में कमीशन हुआ था और 2017-2021 के दौरान इसका व्यापक आधुनिकीकरण किया गया है।

तकनीकी विशेषताएं:

  • लंबाई: 163 मीटर
  • चौड़ाई: 19.3 मीटर
  • विस्थापन: 6,200 टन (मानक), 7,900 टन (पूर्ण लोड)
  • गति: 35 नॉट (65 किमी/घंटा)
  • चालक दल: 300 सदस्य

आधुनिक हथियार प्रणाली:

  • 16 UKSK VLS सेल्स कलिब्र, ओनिक्स और जिरकॉन क्रूज मिसाइलों के लिए
  • 8 (2×4) 3M24 एंटी-शिप मिसाइलें
  • 64 (8×8) VLS सेल्स किंझल सरफेस-टू-एयर मिसाइलों के लिए
  • 1×100mm A-190 गन
  • 4×30mm AK-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम
  • 2×Ka-27 'हेलिक्स' हेलीकॉप्टर

MILAN-2026: विश्व का सबसे बड़ा नौसैनिक अभ्यास

MILAN (Multilateral Naval Exercise) भारतीय नौसेना का प्रमुख द्विवार्षिक अभ्यास है जो 1995 से आयोजित हो रहा है। MILAN-2026 का आयोजन 15-25 फरवरी 2026 तक विशाखापत्तनम में किया जाएगा।

MILAN-2026 की मुख्य विशेषताएं:

  • थीम: "Camaraderie, Cooperation, Collaboration" (सौहार्द्र, सहयोग, सहकार)
  • भागीदार देश: 50+ देश
  • मुख्य कार्यक्रम: अंतर्राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू (IFR)
  • IONS कॉन्क्लेव: हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी

भारतीय नौसेना की भागीदारी:

भारतीय नौसेना अपने सबसे आधुनिक युद्धपोतों को इस अभ्यास में शामिल करेगी, जिनमें शामिल हैं:

  • INS विक्रांत (R11) - स्वदेशी विमानवाहक पोत
  • INS चेन्नई (D65) - कोलकाता-क्लास डिस्ट्रॉयर
  • INS विशाखापत्तनम (D66) - विशाखापत्तनम-क्लास डिस्ट्रॉयर
  • INS मुंबई (D62) - दिल्ली-क्लास डिस्ट्रॉयर
  • INS शक्ति (A57) - फ्लीट सपोर्ट शिप

भारत-रूस नौसैनिक सहयोग का इतिहास

भारत और रूस के बीच नौसैनिक सहयोग का एक लंबा और समृद्ध इतिहास है। दोनों देश 2003 से INDRA नौसैनिक अभ्यास का आयोजन कर रहे हैं, जो द्विवार्षिक आधार पर होता है।

INDRA अभ्यास की मुख्य विशेषताएं:

  • शुरुआत: 2003
  • आवृत्ति: द्विवार्षिक
  • नाम का अर्थ: INDRA = India + Russia
  • उद्देश्य: दोनों नौसेनाओं के बीच सहयोग और अंतर-संचालनीयता बढ़ाना

हाल के INDRA अभ्यास:

  • INDRA-2025 (14वां संस्करण): मार्च-अप्रैल 2025, चेन्नई तट पर
  • INDRA-2023 (13वां संस्करण): नवंबर 2023, बंगाल की खाड़ी में
  • INDRA-2021 (12वां संस्करण): अगस्त 2021, वोल्गोग्राद, रूस में

रणनीतिक महत्व और भू-राजनीतिक संदर्भ

यह संयुक्त नौसैनिक अभ्यास कई कारणों से महत्वपूर्ण है:

1. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन:

चीन की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति के बीच, भारत-रूस सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

2. रक्षा तकनीक साझाकरण:

दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक का स्थानांतरण और संयुक्त विकास परियोजनाएं चल रही हैं। ब्रह्मोस मिसाइल इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है।

3. ऊर्जा सुरक्षा:

रूस भारत के लिए कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है। नौसैनिक सहयोग समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

Global24x7 विश्लेषण: मुख्य बिंदु

प्रमुख तथ्य:

  • यह MILAN का सबसे बड़ा संस्करण होगा जिसमें 50+ देश भाग लेंगे
  • रूसी प्रशांत बेड़े का सबसे आधुनिक फ्रिगेट मार्शल शापोशनिकोव भाग लेगा
  • अभ्यास में हाइपरसॉनिक मिसाइल सिस्टम का प्रदर्शन हो सकता है
  • भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' नीति के तहत स्वदेशी युद्धपोतों का प्रदर्शन
  • चीन-पाकिस्तान नौसैनिक गठबंधन के जवाब में भारत-रूस सहयोग

त्वरित सारांश

मुख्य बिंदु:

  • कब: फरवरी 2026 (18-25 फरवरी विशाखापत्तनम में रूसी पोत)
  • कहां: बंगाल की खाड़ी, विशाखापत्तनम
  • क्या: MILAN-2026 संयुक्त नौसैनिक अभ्यास
  • कौन: 50+ देश, मुख्यतः भारत-रूस
  • महत्व: हिंद-प्रशांत में रणनीतिक संतुलन

निष्कर्ष

भारत-रूस संयुक्त नौसैनिक अभ्यास MILAN-2026 न केवल दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का प्रतीक है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। रूसी प्रशांत बेड़े के आधुनिक फ्रिगेट मार्शल शापोशनिकोव की भागीदारी इस अभ्यास को और भी महत्वपूर्ण बनाती है।

50 से अधिक देशों की भागीदारी के साथ, MILAN-2026 विश्व के सबसे बड़े नौसैनिक अभ्यासों में से एक होगा। यह न केवल भारत की बढ़ती नौसैनिक शक्ति को प्रदर्शित करेगा, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा में भारत की भूमिका को भी मजबूत करेगा।

इस अभ्यास से भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' नीति को भी बल मिलेगा, क्योंकि स्वदेशी युद्धपोत INS विक्रांत जैसे आधुनिक पोत इसमें भाग लेंगे। यह दिखाएगा कि भारत न केवल रक्षा उपकरणों का आयातक है, बल्कि एक सक्षम निर्माता भी है।


स्रोत: TASS, The Hindu, भारतीय नौसेना, रूसी मैरिटाइम बोर्ड

लेखक: Global24x7 न्यूज टीम