29 जनवरी 2026: सोने की कीमत पहली बार 5000 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गई है, जबकि चांदी भी 120 डॉलर के करीब पहुंच गई है। यह महज एक महीने में 15% की बढ़ोतरी है, जो 1979 के बाद से सबसे तेज रैली है। लेकिन इस तूफानी उछाल के पीछे क्या कारण हैं?
Global24x7 Analysis: मुख्य कारक
1. BRICS देशों की आक्रामक सोना खरीदारी
World Gold Council की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 में केवल ब्राजील और चीन ने मिलकर 12 टन सोना खरीदा, जिसकी कीमत लगभग 1.88 बिलियन डॉलर (करीब 16,000 करोड़ रुपए) थी।
ब्राजील: नवंबर में 11 टन सोना खरीदा, जो उसके कुल रिजर्व का 6% है
चीन: लगातार 13 महीनों से सोना खरीद रहा है
पोलैंड: 2025 में सबसे ज्यादा 95 टन सोना खरीदा
कजाकिस्तान: 49 टन की खरीदारी
2. RBI की रणनीतिक चाल
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी विदेशी मुद्रा रिजर्व में सोने का हिस्सा एक साल में 12% से बढ़ाकर 17% कर दिया है। RBI के पास अब 880 टन सोना है, जिसकी वैल्यू पिछले साल 70% बढ़ी है।
महत्वपूर्ण तथ्य: RBI ने अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स की होल्डिंग को लगातार छह महीनों से कम किया है। नवंबर 2025 में यह 186.5 बिलियन डॉलर थी, जो नवंबर 2024 के 234 बिलियन डॉलर से काफी कम है।
3. अमेरिकी डॉलर की कमजोरी
Morgan Stanley के अर्थशास्त्रियों के अनुसार, ट्रंप की नीतियों और बहुध्रुवीय दुनिया की दिशा में बदलाव के कारण लोग डॉलर से दूर जा रहे हैं। 2025 में डॉलर 9% कमजोर हुआ है - यह लगभग एक दशक में सबसे ज्यादा गिरावट है।
4. भू-राजनीतिक तनाव
ट्रंप की अप्रत्याशित नीतियों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है:
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी
ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी
यूरोपीय सहयोगियों पर 100% टैरिफ की धमकी
कनाडा पर व्यापारिक दबाव
Fed चेयरमान जेरोम पॉवेल पर आपराधिक जांच
वर्तमान बाजार स्थिति
धातु
वर्तमान कीमत
2026 में वृद्धि
2025 की वृद्धि
सोना
$5,058 प्रति औंस
15% (26 दिनों में)
65% (1979 के बाद सर्वाधिक)
चांदी
$107.8 प्रति औंस
रिकॉर्ड स्तर के करीब
141% (1979 के बाद सर्वाधिक)
विशेषज्ञों की भविष्यवाणियां
Goldman Sachs का अनुमान:
सोने की कीमत $5,400 प्रति औंस तक जा सकती है, जो "वैश्विक नीतिगत अनिश्चितता" के कारण है।
Bank of America का दावा:
मुख्य निवेश अधिकारी माइकल हार्टनेट का कहना है कि सोना $6,000 से भी ऊपर जा सकता है।
Morgan Stanley का लक्ष्य:
2026 की चौथी तिमाही तक सोना $4,800 प्रति औंस तक पहुंच सकता है।
De-Dollarization का प्रभाव
International Monetary Fund (IMF) के डेटा के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा रिजर्व में डॉलर का हिस्सा 2024 में 58.5% तक गिर गया है, जो 30 साल का सबसे कम स्तर है। 1999 में यह 71% था।
मुख्य बदलाव:
चीन: अमेरिकी सरकारी कर्ज की होल्डिंग 16 साल के निचले स्तर पर
डेनमार्क: चार पेंशन फंड्स ने अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स बेचने का फैसला
यूरोपीय संघ: 10.4 ट्रिलियन डॉलर की अमेरिकी संपत्ति रखता है
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी का रिकॉर्ड
2025 में जनवरी से नवंबर तक की अवधि में:
पोलैंड: 95 टन (सर्वाधिक)
कजाकिस्तान: 49 टन
ब्राजील: 43 टन
चीन: 26 टन
भारत (RBI): 4 टन
आम आदमी पर प्रभाव
सकारात्मक प्रभाव:
सोना-चांदी में निवेश करने वालों को भारी मुनाफा
भारत के सोना आयातकों को फायदा
ज्वेलरी बिजनेस में तेजी
नकारात्मक प्रभाव:
सोने के गहने खरीदना महंगा
शादी-विवाह की लागत में वृद्धि
इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर दबाव
आगे क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रैली अभी भी जारी रह सकती है क्योंकि:
ट्रंप की अप्रत्याशित नीतियां जारी हैं
केंद्रीय बैंक सोना खरीदना जारी रखेंगे
डॉलर की कमजोरी बनी रह सकती है
भू-राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है
Quick Summary
सोना पहली बार $5,000 पार, चांदी $120 के करीब
BRICS देशों ने $1.88 बिलियन का सोना खरीदा
RBI ने सोने का हिस्सा 12% से बढ़ाकर 17% किया
डॉलर 2025 में 9% कमजोर हुआ
विशेषज्ञ $6,000 तक की भविष्यवाणी कर रहे हैं
FAQ Section
Q1: क्या है यह खबर?
A: सोने की कीमत पहली बार $5,000 प्रति औंस पार कर गई है, जबकि चांदी भी रिकॉर्ड स्तर के करीब है। यह BRICS देशों की खरीदारी, RBI की रणनीति और डॉलर की कमजोरी के कारण हो रहा है।
Q2: यह क्यों महत्वपूर्ण है?
A: यह वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में बदलाव का संकेत है। डॉलर का वर्चस्व कम हो रहा है और देश सोने की तरफ रुख कर रहे हैं।
Q3: आम आदमी पर असर?
A: सोने के गहने महंगे होंगे, लेकिन जिनके पास पहले से सोना है उन्हें फायदा होगा। शादी-विवाह की लागत बढ़ेगी।
Q4: आगे क्या होगा?
A: विशेषज्ञों का मानना है कि सोना $6,000 तक जा सकता है। ट्रंप की नीतियों और भू-राजनीतिक तनाव के कारण यह रैली जारी रह सकती है।
Q5: क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?
A: यह व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है। विशेषज्ञ सलाह लेकर ही निवेश करें। SIP के जरिए गोल्ड ETF में निवेश एक विकल्प हो सकता है।
Q6: RBI क्यों सोना खरीद रहा है?
A: RBI डॉलर पर निर्भरता कम करने और मुद्रास्फीति से बचाव के लिए सोना खरीद रहा है। यह आर्थिक सुरक्षा की रणनीति है।
Q7: BRICS का क्या रोल है?
A: BRICS देश डॉलर के विकल्प के रूप में सोने को देख रहे हैं। वे अपनी मुद्रा बनाने की तैयारी में हैं और डॉलर की निर्भरता कम कर रहे हैं।